क्या भूत सच में होते हैं?
क्या वे भी एक अनोखा जीवन जी रहे होते हैं जो मरने के बाद शुरू होता हो?
क्या कोई ऐसी जगह है जहां भूत रहते हैं?
नमस्कार दोस्तों! मै हूं आपका दोस्त हर्ष और आप आएं हैं रोमांच की दुनिया पर।
इंसान की ये फितरत है कि वह हर चीज जानना चाहता है। वह जिन चीजों से डरता है उनको भी हाथ लगाना चाहता है। भूतों के बारे मे जानना भी कुछ ऐसा ही है।
यदि आप भगवान मे विश्वास करते हैं तो आप शैतान को भी जानते होंगे। यदि आप अच्छाई पर विश्वास करते हैं तो आप बुराई के बारे मे जानते होंगे। इसी तरह जब आप इंसान के होने के बारे मे सोचते होंगे तो आप के जेहन मे भूतों का खयाल तो जरूर आता होगा।
कुछ लोग भूतों के होने को मानते हैं और उनसे डरते हैं। कुछ मानकर भी ना डरने की हिम्मत दिखाते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जिन्हे भूतों के होने पर भरोसा ही नहीं है। वास्तव मे वे होतें हैं या नही ये तो वही बता सकता है जो उनसे मिल ले लेकिन ये जरूर सत्य है कि एक बार यदि कोई भी इनसे मिल जाये तो उसका .....
समझते हैं ना।
दोस्तों आज हम जानेंगे एशिया के सबसे डरावने किले के बारे मे जहां भूतों का डेरा जमा हो जाता है और फिर आम आदमी का वहां पर रुकना मौत को दावत देने जैसा हो जाता है।
भानगढ़ का किला
राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की ढ़लान पर सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा पर बना भानगढ़ का किला एशिया का सबसे डरावना किला है।
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वैसे तो राजस्थान के कई सारे किले हैं जो अपने अंदर गहरे राज छिपाए हुए हैं लेकिन भानगढ़ का किला इन सभी मे सबसे ज्यादा अजीब है। 17वीं शताब्दी मे बनाया गया ये किला जितना अधिक खूबसूरत है उतना ही अधिक डरावना भी। इस किले के बारे मे यहां के लोग बहुत सी कहानियां बताते रहते हैं जिनमें दो कहानियां सबसे ज्यादा प्रचलित है।
गुरू बालू नाथ का श्राप
17वीं शताब्दी मे जब इस किले का निर्माण प्रारम्भ होने जा रहा था तब यहां पर एक गुरू बालू नाथ की कुटिया थी। उस समय राजा माधो सिहं जिन्होने इस किले का निर्माण कराया, वे बालू नाथ के पास किला बनाने की अनुमति लेने आए। बालूनाथ ने किले बनाने की अनुमति तो दे दी किंतु इस शर्त पर कि कभी भी किसी भी इमारत की छाया उनकी कुटिया पर ना पड़े।
किला बनना शुरू हो गया और फिर बनाने वाले इस शर्त को भूल गये और अपनी मर्जी से किला बना दिया। जब गुरू बालू नाथ वापस आए और उन्होने देखा कि किले की छाया उनकी कुटिया पर पड़ रही है तो उन्होने श्राप दिया कि यह किला बर्बाद हो जाए और फिर धीरे-धीरे किले मे रहने वाले लोगों की शानो-शौकत खत्म होने लगी और यह वीरान हो गया।
आज भी आप अगर यहां आएं तो आपको यहां की बर्बादी के अवशेष मिल जायेंगे। मजे की बात ये है कि गुरू बालू नाथ की कुटिया अब भी वहीं पर है।
इसके बारे मे एक और कहानी प्रचलित है।
रानी रत्नावती और तांत्रिक सिंघिया
भानगढ़ की अजीब दास्तानोंं मे यह कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है। रत्नावती भानगढ़ की अत्यंत खूबसूरत राजकुमारी थी। उनके सौंदर्य की चर्चा उस समय चारो ओर थी। बहुत से राज्यों से उनके लिये रिश्ते आ रहे थे। ना केवल राजपरिवार के लोग वरन जहां-जहां जो व्यक्ति भी राजकुमारी को देखता, वह उनके सौंदर्य पर मोहित हो जाता।
उसी राज्य मे रहने वाला एक तांत्रिक सिंघिया भी राजकुमारी के सौंदर्य पर मंत्रमुग्ध होकर अपना दिल हार बैठा था। वह किसी भी तरह राजकुमारी को पाना चाहता था। चूंंकि वह एक आम आदमी था इसलिए राजकुमारी से उसका विवाह होना असम्भव था, यह बात उसे अच्छे से पता थी इसीलिये उसने राजकुमारी को प्राप्त करने की एक योजना बनाई।
तांत्रिक सिंघिया काले जादू को जानता था। इसलिये एक दिन जब राजकुमारी की एक दासी बाजार से सुगंधित तेल(इत्र) खरीद रही थी, उसी समय सिंघिया ने उस तेल पर जादू कर दिया। जादू कुछ ऐसा था कि जैसे ही राजकुमारी उस तेल को लगाती, वैसे ही वह जादू के प्रभाव मे आकर सब कुछ भूलकर तांत्रिक के पास भागी चली जाती और अपना सब कुछ उसे सौंप देती।
जब वह दासी बाजार से तेल लेकर राजकुमारी तक पहुंची और राजकुमारी ने तेल अपने हाथों मे लिया, तब राजकुमारी को तेल मे कुछ अजीब लगा। तेल का रंग कुछ अजीब था और वह सामान्य तेल की तरह तरल नहीं लग रहा था।
चूंकि उस समय काला जादू लोगों द्वारा जाना-पहचाना जाता था, इसीलिये राजकुमारी समझ गयी कि इसमें कुछ गड़बड़ है और उन्होने तेल की शीशी को एक बड़े पत्थर पर पटक दिया। पत्थर पर तेल लगते ही जादू पत्थर पर पहुंच गया और पत्थर तांत्रिक सिंघिया की तरफ लुढ़कने लगा। इतने बड़े पत्थर को अपनी ओर आते देख सिंघिया ने बचने की कोशिश की लेकिन वह बच नहीं सका और पत्थर ने उसे कुचल दिया और वह मर गया।मरने से पहले उसने श्राप दिया कि यह किला नष्ट हो जाए, यहां रहने वाले मर जाए और दोबारा जन्म ना ले सके।
उसके बाद यहां सब नष्ट हो गया। राजकुमारी की भी आसामयिक मृत्यु हो गयी यद्यपि यहां के लोगों का मानना है कि वे फिर से जन्म लेकर आयेंगी।
यहां आने पर आपको कुछ बातें पता चलेंगी।
1. भारत सरकार का लगाया गया बोर्ड जिसमे साफ-साफ लिखा है कि सूर्योदय के पहले व सूर्यास्त के बाद किसी का भी प्रवेश वर्जित है। इससे पता चलता है कि वहां सच मे कुछ अजीब होता है। इसके अतिरिक्त यहां पर भारतीय पुरातत्व विभाग के लोग भी मौजूद रहते हैं।
2. इस किले के आसपास के गांवो के घरोंं पर छत नही है। ऐसा माना जाता है कि श्राप के कारण यहां किसी भी घर मे छत नही हो सकती है। यदि कोई छत बना भी देता है तो बहुत जल्द वह गिर जाती है।
3. यहां आसपास कोई होटल या रुकने की जगह नही है जिससे आप किले के बाहर भी रात को नही रुक सकते हैं। किले के अंदर तो अंधेरे मे जाने की मनाही है ही।
4. यहां रहने वाले स्थानीय लोगों ने अक्सर कई तरह की डरावनी और अजीब आवाजें सुनी हैं।
कई बार लोगों ने किसी लड़की के नाचने की आवाज, लोगों के बात करने की आवाज, चहलकदमी की आवाज सुनी है। किले के अंदर बंदर, चमगादड़ आदि जीव रहते हैं जो लगातार आवाज करते रहते हैं लेकिन जब भी कोई आदमी रात के अंधेरे मे अंदर जाने की कोशिश करता है, वह वापस नही आता है।
भानगढ़ का किला अपने अंदर बहुत सेअनसुलझे राज दफन किये हुए है जो समय से साथ नयी-नयी कहानियों के रूप मे फैलते जा रहे हैं। यदि आप ऐसी जगहों पे घूमने का शौक रखते हैं तो आप यहां जरूर आइये। जयपुर हवाई अड्डे से यह जगह लगभग 88 किलोमीटर पर है जहां आप बस से पहुंच सकते हैं।
यहां आने के लिये सुबह निकलना ज्यादा बेहतर है ताकि आप दोपहर तक यहां आ जाये और पूरे किले को कुछ घंटो मे घूम ले और सूर्यास्त होने से बाहर निकल जायें।
वैसे यहां पर आपको स्थानीय ढाबे मिल जायेंगे लेकिन आप चाहे तो अपनी सुविधा के लिये खाने का सामान ला सकते हैं। जैसा पहले ही बता दिया गया है कि यहां रुकने की कोई व्यवस्था नही है तो आपको शाम होने पर अलवर के लिये या जयपुर के लिये निकलना होगा।
यहांं पास मे ही सरिस्का टाइगर रिजर्व है तो यदि आप जंगली जानवरों को देखने के शौकीन हैं तो आप उसे भी घूम सकते हैं।
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